मध्य प्रदेश हाई कोर्ट या जिला अदालतों में स्टेनोग्राफर की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों का सबसे पहला सवाल यही होता है कि जॉइनिंग के बाद पहले महीने बैंक खाते में वास्तव में कितनी सैलरी आएगी। नोटिफिकेशन में केवल पे-स्केल और ग्रेड पे लिखा होता है, लेकिन भत्तों और अनिवार्य कटौतियों के बाद टेक-होम अमाउंट अलग बनता है।
यहाँ MP High Court Stenographer (Grade-2 एवं Grade-3) के वेतन ढांचे, मासिक भत्तों, कटौतियों और करियर ग्रोथ की पूरी जानकारी दी गई है।
MP High Court Stenographer Salary Structure Overview
| विवरण (Description) | Stenographer Grade-2 | Stenographer Grade-3 |
| पे लेवल (7th CPC) | Level 7 | Level 6 / 8 (राज्य नियम अनुसार) |
| ग्रेड पे (Grade Pay) | ₹2,800 | ₹2,400 |
| शुरुआती बेसिक पे | ₹28,700 | ₹25,300 |
| पे स्केल | ₹28,700 – ₹91,300 | ₹25,300 – ₹80,500 |
| अनुमानित ग्रॉस सैलरी | ₹47,000 – ₹49,000 | ₹42,000 – ₹44,000 |
| अनुमानित इन-हैंड सैलरी | ₹38,000 – ₹42,000 | ₹34,000 – ₹37,000 |
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सैलरी कैलकुलेशन: खाते में कितना पैसा आएगा (ग्रेड-2)
स्टेनोग्राफर ग्रेड-2 (ग्रेड पे ₹2800) के शुरुआती बेसिक पे ₹28,700 के आधार पर मासिक वेतन की गणना नीचे दी गई है:
1. मिलने वाले प्रमुख वेतन (ग्रॉस सैलरी)
| वेतन घटक (Component) | गणना का आधार | अनुमानित राशि |
| बेसिक पे (Basic Pay) | निर्धारित न्यूनतम मूल वेतन | ₹28,700 |
| महंगाई भत्ता (DA) | बेसिक पे का 53% | ₹15,211 |
| मकान किराया भत्ता (HRA) | शहर की श्रेणी (X/Y/Z) अनुसार (9% से 18% approx) | ₹2,583 – ₹5,166 |
| परिवहन भत्ता (TA) व अन्य | राज्य सरकार के नियमानुसार | ₹1,200 – ₹1,800 |
| कुल ग्रॉस सैलरी (Gross) | भत्तों का कुल योग | ≈ ₹47,694 – ₹50,877 |
(नोट: DA और HRA की यह गणना वर्तमान देय दरों के आधार पर सांकेतिक है। वास्तविक राशि पोस्टिंग शहर के अनुसार तय होगी।)

2. अनिवार्य सरकारी कटौतियां (Deductions)
ग्रॉस सैलरी बनने के बाद खाते में आने से पहले कुछ अनिवार्य कटौतियां की जाती हैं:
- NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम): (Basic Pay + DA) का 10% = ₹4,391
- GIS (ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम): लगभग ₹200 – ₹300
- प्रोफेशनल टैक्स (MP Govt): लगभग ₹200 – ₹250
- कुल अनुमानित कटौती: ₹4,800 – ₹5,000
3. फाइनल इन-हैंड सैलरी (Net Take-Home)
इन-हैंड सैलरी = ग्रॉस सैलरी – कटौतियां
- ग्रेड-2 (Grade Pay ₹2800): लगभग ₹39,000 से ₹43,000 प्रति माह।
- ग्रेड-3 (Grade Pay ₹2400): लगभग ₹34,000 से ₹37,000 प्रति माह।
अगर आपकी पोस्टिंग भोपाल, इंदौर, ग्वालियर या जबलपुर जैसे बड़े शहरों (हाई कोर्ट बेंच/मुख्यालय) में होती है, तो HRA अधिक मिलने से टेक-होम सैलरी छोटे जिलों के मुकाबले थोड़ी ज्यादा होगी।
प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान वेतन
मध्य प्रदेश शासन के नियमों के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों को 2 से 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रखा जाता है:
- स्टाइपेंड/वेतन: MP के वर्तमान सेवा नियमों के तहत प्रोबेशन के दौरान बेसिक पे का निर्धारित प्रतिशत (प्रथम वर्ष 70%, द्वितीय वर्ष 80%, तृतीय वर्ष 90%) या पूर्ण बेसिक पे के साथ भत्ते देय होते हैं।
- स्थायीकरण: प्रोबेशन अवधि सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद कर्मचारी को पूरे वार्षिक इंक्रीमेंट और नियमित पे-स्केल का पूरा लाभ मिलने लगता है।
प्रमोशन और करियर ग्रोथ
हाई कोर्ट और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में स्टेनोग्राफर के लिए विभागीय पदोन्नति का क्रम इस प्रकार रहता है:
- Stenographer Grade-3 (प्रारंभिक प्रवेश स्तर)
- Stenographer Grade-2
- Stenographer Grade-1 (सीनियर स्टेनोग्राफर)
- Personal Assistant (PA)
- Private Secretary (PS) / Principal Private Secretary (PPS) (राजपत्रित स्तर, जहाँ बेसिक पे और ग्रेड पे काफी उच्च होता है)
MP High Court Stenographer Salary Chart

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ’s)
1. MP High Court Stenographer Grade-2 की पहली इन-हैंड सैलरी कितनी मिलती है?
सभी भत्तों (DA, HRA) को जोड़कर और NPS कटौती के बाद, शुरुआती इन-हैंड सैलरी लगभग ₹39,000 से ₹43,000 प्रति माह के बीच आती है।
2. क्या कोर्ट स्टेनोग्राफर की जॉब में CPCT स्कोरकार्ड अनिवार्य है?
हाँ, मध्य प्रदेश की अधिकांश अदालती भर्तियों में कंप्यूटर प्रोफिशिएंसी सर्टिफिकेशन टेस्ट (CPCT) का वैलिड स्कोरकार्ड और हिंदी/अंग्रेजी शॉर्टहैंड डिप्लोमा अनिवार्य होता है।
3. क्या हर साल सैलरी में बढ़ोतरी होती है?
हाँ, सरकारी नियमानुसार साल में एक बार 3% वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) मूल वेतन में जुड़ती है। इसके अलावा साल में दो बार राज्य सरकार द्वारा महंगाई भत्ते (DA) में होने वाली वृद्धि का लाभ भी मिलता है।
4. क्या ग्रेड-3 से ग्रेड-2 में प्रमोशन के लिए विभागीय परीक्षा होती है?
पदोन्नति मुख्य रूप से वरिष्ठता (Seniority-cum-merit) और समय-समय पर आयोजित होने वाले आंतरिक विभागीय स्किल टेस्ट के आधार पर की जाती है।